मायरा केयर फाउंडेशन ने मनाया विश्व ऑटिज़्म जागरूकता दिवस, फाउंडेशन द्वारा ऑटिज़्म स्पेक्ट्रम विकार पर जागरूकता का किया प्रयास – Latest News Today, Breaking News, Uttarakhand News in Hindi

मायरा केयर फाउंडेशन ने मनाया विश्व ऑटिज़्म जागरूकता दिवस, फाउंडेशन द्वारा ऑटिज़्म स्पेक्ट्रम विकार पर जागरूकता का किया प्रयास

देहरादून

विश्व ऑटिज़्म जागरूकता दिवस के अवसर पर मायरा केयर फाउंडेशन ने उत्तरांचल प्रेस क्लब, देहरादून में एक विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया।

पत्रकारों को संबोधित करते हुए जया और निशांत नवानी द्वारा ऑटिज़्म स्पेक्ट्रम विकार (एएसडी) से प्रभावित बच्चों और वयस्कों के प्रति समाज में जागरूकता फैलाने, समावेशिता को बढ़ावा देने तथा उनके लिए समग्र सहयोग प्रणाली की आवश्यकता पर जोर दिया गया। इस मुद्दे को लेकर फाउंडेशन उत्तराखंड स्तर पर मजबूती से उठाने का संकल्प लेते नजर आया।

विश्व ऑटिज़्म जागरूकता दिवस बताते छुएं कि प्रत्येक वर्ष दुनिया भर में 2 अप्रैल को मनाया जाता है, लेकिन मायरा केयर फाउंडेशन ने इसे एक दिन पहले ही शुरू कर एक सकारात्मक संदेश दिया। अपने संबोधन में फाउंडेशन के संस्थापक डॉ निशांत नवानी ने बताया कि भारत में ऑटिज़्म प्रभावित व्यक्तियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, लेकिन जागरूकता की कमी के कारण उनके परिवारों को सामाजिक, शैक्षिक और चिकित्सकीय चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

फाउंडेशन की सह संस्थापक डॉ जया नवानी ने बताया कि उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में संसाधनों की कमी के कारण ये बच्चे अक्सर उपेक्षित रह जाते हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस में विशेषज्ञों ने साझा किया कि समय पर हस्तक्षेप से 80% मामलों में सकारात्मक परिणाम प्राप्त हो सकते हैं।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मौजूद अनीता शर्मा, ऑपरेशन्स हेड, मायरा केयर फाउंडेशन द्वारा होलिस्टिक लर्निंग सेंटर की योजना के बारे में विस्तृत रूप से जानकारी साझा की गई । देहरादून में स्थापित हो रहे इस सेंटर की परिकल्पना ऑटिज़्म प्रभावित बच्चों और वयस्कों के लिए एक ‘एक छत के नीचे सब कुछ’ मॉडल पर आधारित है।

अनीता शर्मा ने कहा, “हमारा लक्ष्य केवल शिक्षा नहीं, बल्कि शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक विकास को समग्र रूप से संबोधित करना है। सेंटर में आधुनिक थेरेपी, विशेष शिक्षा, कला चिकित्सा, योग और व्यावसायिक प्रशिक्षण जैसी सेवाएं उपलब्ध होंगी।”

शर्मा ने जोर देकर कहा कि यह सेंटर उत्तराखंड के ग्रामीण क्षेत्रों के लिए भी पहुंच योग्य होगा, जहां सरकारी सुविधाओं की कमी है,साथ ही कहा, “ऑटिज़्म कोई बीमारी नहीं, बल्कि एक अलग तरह की प्रतिभा है। हमें इसे समझना और समर्थन देना होगा।”

सेंटर की प्रमुख सेवाएं और योजनाएं विशेष शिक्षा कार्यक्रम: व्यक्तिगत लर्निंग प्लान (आईएलपी) के तहत संज्ञानात्मक विकास।

थेरेपी सत्र: स्पीच, ऑक्यूपेशनल और बिहेवियरल थेरेपी।

परिवार सहयोग: माता-पिता के लिए प्रशिक्षण कार्यशालाएं और काउंसलिंग।

भविष्य की योजनाएं: 2026 के अंत तक 50 बच्चों की क्षमता, उसके बाद विस्तार और मोबाइल यूनिट्स का संचालन शामिल है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *